भारतीय जनता पार्टी महानगर कार्यालय पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल जी पर अभद्र टिप्पणी करने पर कर्नल अजय कोठियाल जी के द्वारा प्रेस वार्ता हुई प्रेस वार्ता में ,
कर्नल अजय कोठियाल का कांग्रेस पर तीखा हमला: “राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर नेहरू से राहुल गांधी तक एक ही राजनीतिक सोच दिखाई देती है”
राष्ट्रीय सुरक्षा, 1962 के भारत-चीन युद्ध, पंचशील समझौते और अजीत डोभाल पर राहुल गांधी की टिप्पणियों को लेकर कांग्रेस से जवाब मांगा
देहरादून। कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र एवं विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित कर्नल अजय कोठियाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा, भारत की सैन्य रणनीति और कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उत्तराखंड के पूर्व सैनिकों के कल्याण से जुड़े सलाहकार निकाय के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता कर्नल कोठियाल ने अपने संबोधन में जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राहुल गांधी के कार्यकाल से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर कांग्रेस नेतृत्व की प्राथमिकताओं और निर्णयों की समीक्षा आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा, सेना का सम्मान और राष्ट्रीय हित किसी भी राजनीतिक दल के चुनावी हितों से ऊपर होने चाहिए। उनके अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बयानों और ऐतिहासिक निर्णयों को लेकर देश के सामने कई सवाल हैं, जिनका स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए।
1. नेहरू काल, तिब्बत और पंचशील समझौते पर सवाल
कर्नल अजय कोठियाल ने 1947 में राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े कथित प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय तिरंगे के साथ ब्रिटेन के यूनियन जैक को शामिल करने का विचार भी सामने आया था। उन्होंने इस संदर्भ में कांग्रेस नेतृत्व की तत्कालीन सोच पर सवाल उठाए।
उन्होंने वर्ष 1954 के पंचशील समझौते और भारत-चीन संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ के नारे के बीच भारत ने तिब्बत के प्रश्न पर ऐसी नीति अपनाई, जिसके परिणामस्वरूप भारत और चीन के बीच स्थित तिब्बत का पारंपरिक बफर क्षेत्र कमजोर हुआ। उनके अनुसार, इससे चीन को भारतीय सीमाओं के निकट अपनी सामरिक स्थिति मजबूत करने का अवसर मिला।
कर्नल कोठियाल ने कहा कि पंचशील से जुड़ी नीति का उस समय भी विरोध हुआ था। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा राज्यसभा में उठाई गई आपत्तियों तथा आचार्य जे.बी. कृपलानी की आलोचना का उल्लेख किया। दस्तावेज़ में कृपलानी से संबंधित अंग्रेज़ी अभिव्यक्ति ‘Born in Sin’ अर्थात ‘पाप से पैदा हुआ’ का भी उल्लेख है।
2. वर्ष 1962 का युद्ध और सैन्य नेतृत्व पर प्रश्न
कर्नल कोठियाल ने 1962 के भारत-चीन युद्ध को भारतीय सैन्य इतिहास का अत्यंत दुखद अध्याय बताते हुए तत्कालीन राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठाए।
उन्होंने जनरल उमराव सिंह द्वारा कथित तौर पर फॉरवर्ड पॉलिसी का विरोध किए जाने और उनके साथ हुए व्यवहार का उल्लेख किया। साथ ही, लेफ्टिनेंट जनरल बी.एम. कौल को महत्वपूर्ण सैन्य कमान दिए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि युद्धकालीन नेतृत्व में सैन्य अनुभव, योग्यता और परिचालन क्षमता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी।
उनके आरोप के अनुसार, तत्कालीन व्यवस्था में राजनीतिक निकटता को लेकर गंभीर सवाल उठे और सीमावर्ती मोर्चों पर रसद, कपड़ों तथा गोला-बारूद की उपलब्धता जैसी चुनौतियों ने सैनिकों की स्थिति कठिन बनाई। उन्होंने बी.एम. कौल और नेहरू के संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए।
कर्नल कोठियाल ने कहा कि 1962 के युद्ध में भारतीय सैनिकों ने असाधारण साहस और देशभक्ति का परिचय दिया, लेकिन राजनीतिक एवं सैन्य स्तर की कमियों की भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के संदर्भ में बी.एम. कौल से जुड़े विवादों तथा बी.एन. मुल्लिक की पुस्तक Himalayan Blunder के बजाय युद्ध संबंधी प्रकाशित साहित्य और जाँच अभिलेखों की समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने तथाकथित हेंडरसन ब्रूक्स–भगत रिपोर्ट का भी उल्लेख करते हुए कहा कि 1962 की पराजय के कारणों और तत्कालीन नेतृत्व की जवाबदेही पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
3. गढ़वाल राइफल्स और कुमाऊँ रेजिमेंट के शौर्य को किया याद
कर्नल अजय कोठियाल ने उत्तराखंड की सैन्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि 1962 के युद्ध में गढ़वाल राइफल्स और कुमाऊँ रेजिमेंट के जवानों ने अद्वितीय वीरता का परिचय दिया।
उन्होंने रेजांग ला के युद्ध में 13 कुमाऊँ के जवानों के साहस और मेजर शैतान सिंह के सर्वोच्च बलिदान का उल्लेख किया। मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के नूरानांग क्षेत्र में 4 गढ़वाल राइफल्स की भूमिका और राइफलमैन जसवंत सिंह रावत के शौर्य को भी याद किया। जसवंत सिंह रावत को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। कर्नल कोठियाल ने कहा कि इन वीर सैनिकों की गाथाएँ उत्तराखंड और पूरे देश के लिए गर्व का विषय हैं।
उन्होंने स्वयं 4 गढ़वाल राइफल्स से अपने संबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि सेना के शौर्य और बलिदान का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
4. इंदिरा गांधी के कार्यकाल से जुड़े विवाद
कर्नल कोठियाल ने इंदिरा गांधी के कार्यकाल की कुछ घटनाओं का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेतृत्व से ऐतिहासिक जवाबदेही के प्रश्न उठाए।
उन्होंने मार्च 1966 में मिजोरम के आइजोल में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई का संदर्भ दिया और नागरिकों पर हुई बमबारी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने इस प्रसंग में तत्कालीन राजनीतिक निर्णयों और जिम्मेदारियों की समीक्षा की आवश्यकता बताई।
उन्होंने नवंबर 1966 में गौ-रक्षा की मांग को लेकर दिल्ली में हुए साधु-संतों के आंदोलन और संसद के निकट हुई पुलिस गोलीबारी का भी उल्लेख किया। उनके संबोधन में करपात्री महाराज तथा उस समय के घटनाक्रम का संदर्भ आया।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने 1975 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद आपातकाल लगाए जाने, नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़े प्रभाव को लेकर कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने 1984 में स्वर्ण मंदिर में हुए सैन्य अभियान को भी इंदिरा गांधी के कार्यकाल से जुड़े विवादास्पद प्रसंगों में शामिल किया।
5. राहुल गांधी के बयानों और राजनीतिक आचरण पर सवाल
कर्नल कोठियाल ने राहुल गांधी के राजनीतिक आचरण का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय संस्थाओं और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर जिम्मेदार भाषा का प्रयोग किया जाना चाहिए।
उन्होंने वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा संसद में पारित प्रस्ताव से संबंधित अध्यादेश की प्रति राहुल गांधी द्वारा सार्वजनिक रूप से फाड़े जाने की घटना का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस घटनाक्रम ने तत्कालीन सरकार और उसके नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे।
उन्होंने वर्ष 2018 में संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गले मिलने के बाद राहुल गांधी द्वारा आंख मारने की घटना का भी संदर्भ दिया और इसे संसदीय मर्यादा तथा राजनीतिक व्यवहार की दृष्टि से अनुचित बताया।
कर्नल कोठियाल ने वर्ष 2026 के एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर राहुल गांधी की प्रतिक्रिया तथा एक विमान के अपहरण से जुड़े प्रसंग पर उनकी कथित चुप्पी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गौरव, खिलाड़ियों की उपलब्धियों और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर राजनीतिक नेतृत्व की प्रतिक्रिया स्पष्ट और जिम्मेदार होनी चाहिए।
6. जनरल बिपिन रावत और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर टिप्पणियों को लेकर आपत्ति
कर्नल अजय कोठियाल ने पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर राहुल गांधी से संबंधित कथित टिप्पणियों पर आपत्ति जताई।
दस्तावेज़ में जनरल बिपिन रावत के संदर्भ में “गली का गुंडा” तथा अजीत डोभाल के संदर्भ में “मोबाइल कैमरे के अंदर बैठे हैं” जैसे कथन उद्धृत किए गए हैं। कर्नल कोठियाल ने इन कथनों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पदों और देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले व्यक्तियों के सम्मान के संदर्भ में अनुचित बताया।
उन्होंने कहा कि सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पदाधिकारियों पर राजनीतिक बहस हो सकती है, लेकिन ऐसी बहस तथ्यों, मर्यादा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर होनी चाहिए।
7. अजीत डोभाल के योगदान का उल्लेख
कर्नल कोठियाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भूमिका का उल्लेख करते हुए उनके सुरक्षा और खुफिया क्षेत्र से जुड़े अनुभवों की चर्चा की।
उन्होंने पाकिस्तान में गुप्त रूप से काम करने, भारत की सुरक्षा से संबंधित खुफिया गतिविधियों, राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और विभिन्न सुरक्षा अभियानों में उनकी भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने सिक्किम के भारत में विलय, कंधार विमान अपहरण संकट, म्यांमार में सीमा-पार अभियान, वर्ष 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, वर्ष 2019 की बालाकोट कार्रवाई और वर्ष 2025 के ऑपरेशन सिंदूर जैसे विषयों को राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक संदर्भ में रखा।
उन्होंने डोकलाम और गलवान जैसे सीमा विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सुरक्षा नीति में रणनीतिक दृढ़ता और सैन्य तैयारियों का महत्वपूर्ण स्थान है।
कर्नल कोठियाल ने विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन तथा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय जैसी संस्थाओं के माध्यम से नीति अनुसंधान, समन्वय और सुरक्षा संबंधी संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने के महत्व पर भी बल दिया।
8. पंचशील से गलवान तक: विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस
कर्नल कोठियाल ने पंचशील समझौते और वर्ष 1962 के युद्ध के बीच संबंधों की समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति और सुरक्षा नीति का मूल्यांकन केवल घोषित सिद्धांतों से नहीं, बल्कि उनके वास्तविक परिणामों से भी होना चाहिए।
उन्होंने तर्क दिया कि तिब्बत के संबंध में भारत की तत्कालीन नीति और चीन के साथ संबंधों को लेकर अपनाई गई रणनीति के दीर्घकालीन प्रभावों पर गंभीर चर्चा आवश्यक है। उन्होंने वर्ष 2020 की गलवान घाटी की घटना को भारत-चीन संबंधों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
उनका कहना था कि भारत को अपनी सीमाओं की सुरक्षा, सामरिक तैयारी और राष्ट्रीय हितों के मामले में किसी भी प्रकार की कमजोरी से बचना चाहिए।
9. कांग्रेस से सीधे सवाल
कर्नल अजय कोठियाल ने कांग्रेस नेतृत्व से दो प्रमुख सवाल पूछे।
पहला सवाल: इंदौर में 19 सितंबर 2026 को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयान को क्या कांग्रेस केवल राजनीतिक वक्तव्य मानती है, या वह यह भी स्वीकार करती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पदों और व्यक्तियों पर की गई टिप्पणियों का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है?
दूसरा सवाल: क्या कांग्रेस के सभी नेता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर राहुल गांधी द्वारा दिए गए कथित बयान का समर्थन करते हैं? क्या पार्टी इस विषय पर अपना आधिकारिक पक्ष स्पष्ट करेगी?
कर्नल कोठियाल ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर देश को स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। उनके अनुसार, यह केवल राजनीतिक दलों का प्रश्न नहीं, बल्कि सेना, सुरक्षा संस्थानों और देश के नागरिकों के सम्मान से जुड़ा विषय है।
10. निष्कर्ष: राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति नहीं, जिम्मेदारी जरूरी
अपने संबोधन के निष्कर्ष में कर्नल अजय कोठियाल ने नेहरू, इंदिरा गांधी और राहुल गांधी के कार्यकाल से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को एक व्यापक राजनीतिक बहस के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व के कुछ निर्णयों और बयानों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य नेतृत्व और संवेदनशील संस्थागत विषयों पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीतिक निष्ठा से अधिक महत्व योग्यता, जवाबदेही और देशहित को दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, देश की सुरक्षा से जुड़े संस्थानों पर टिप्पणी करते समय प्रत्येक राजनीतिक नेता को अपने शब्दों और उनके संभावित प्रभाव के प्रति सजग रहना चाहिए।
कर्नल कोठियाल ने कहा कि देश के सैनिक और जागरूक नागरिक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर स्पष्टता और जिम्मेदारी की अपेक्षा रखते हैं। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से आग्रह किया कि वह राहुल गांधी के कथित बयानों पर अपना रुख स्पष्ट करे और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर देश के सामने तथ्यात्मक जवाब रखे।
कर्नल कोठियाल का संदेश स्पष्ट था: देश की सुरक्षा, सेना का सम्मान और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं; इन विषयों पर किसी भी राजनीतिक दल को जवाबदेही से बचना नहीं चाहिए।

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