सर्राफा व्यापारी कल पूरे प्रदेश में करेंगे सांकेतिक विरोध प्रदर्शन
Dehradun
आप भली भाँति अवगत हैं की माननीय प्रधान मंत्री महोदय द्वारा गत दिवस स्वर्ण आभूषणों की खरीदारी के संबंध में जो घोषणा की उसका विपरीत असर भारत के समस्त स्वर्ण कारोबारियों और निर्माताओं पर पड़ता दिख रहा है।
जहाँ बात भारत की अर्थव्यवस्था की है तो देश हित में सरकार की नीतियों का पालन करना भी हमारा कर्तव्य बनता है चूँकि बात एक वर्ग विशेष की भी है और प्रधान मंत्री महोदय द्वारा राष्ट्र के नाम संदेश में समस्त सर्राफा उद्योग को ही केंद्रित करते हुए भारतकोश जनता को सोने ना खरीदने के बात कह कर इस कारोबार को आर्थिक नुकसान की तरफ़ धकेल दिया है जिसका प्रतिकूल असर न केवल उत्तराखंड वरन् सम्पूर्ण भारत के सर्राफा व्यापारियों में देखने को मिला है।
सोना जो भारत की सभ्यता का प्रतीक है और लगभग सभी त्योहारों में सोने चांदी की खरीदारी को शुद्धता अथवा धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है।
कुछ वर्ष पूर्व भी सर्राफा समाज ने सरकार की टैक्स विरोधी नीतियों के विरोध में अपनी एकता का परिचय देते हुए चालीस दिन तक अपने प्रतिष्ठान बंद किए थे जिस से भारत सरकार को पुनर्विचार करना पड़ा था।
यकायक सोने पर आयात शुल्क: 6% से 15 % बढ़ाना एकतरफा और अनुचित फ़ैसला है।
अगर सर्राफा व्यापारी का एक साल सोना ना बिका तो वह अपना और अपने परिवार पालन पोषण कहाँ से करेगा।
आभूषण निर्माता जो की सर्राफा कारोबार की रीड की हड्डी माने जाते है वे बिल्कुल निकम्मे हो जाएँगे और भुखमरी के कगार पर पहुँच जाएँगे।
हम सभी सर्राफा कारोबारि भारत की G D P और
G S T बढ़ाने में अपना बहुमूल्य योगदान देते हैं अतः अपील करते हैं कि भारत सरकार इस विषय पर हमारी पीड़ा समझे और अन्य अनुकूल नीतियों पर विचार करे।
उत्तराखंड के सभी सर्राफा साथियों से निवेदन है कि कल दिनांक 14 May 2026 दिन शुक्रवार को अपने अपने क्षेत्रों में मोमबत्ती जला कर इस आयात शुल्क की बढ़ोतरी और जनता को सोना न ख़रीदने की घोषणा के प्रति अपना सांकेतिक विरोध दर्ज करेंगे ।
इसी श्रृंखला में देहरादून में भी कल शाम 7 बजे सर्राफा बाज़ार, धामवाला में कैंडल जलाकर कर एक शांतिपूर्वक सांकेतिक विरोध किया जाएगा।
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